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मनोविज्ञान में करियर |Career in Neurophysiology | Complete information

मनोविज्ञान में करियर |Career in Neurophysiology | Complete information
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मनोविज्ञान में करियर 

आधुनिक जीवन में अवसाद यानी डिप्रेशन मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा दुश्मन है। अवसाद की वजह अनेक प्रकार के हो सकते हैं। अगर किसी इंसान डिप्रेशन का शिकार हो जाता है तो उसकी पूरी दिनचर्या एक नीरस और ऊर्जाहीन होकर कटती है।दु:खी व्यवहार के साथ-साथ,  गुस्सैल व्यक्तित्व एवं उसके व्यवहार में चिड़चिड़ापन आ जाता है।वह एक उत्साहीन मनोबल के साथ किसी काम को अंजाम देता है इसके कारण किसी भी क्षेत्र में अपेक्षित सफल नहीं हो पाता है। इस स्थिति में हमेशा बिना समय गवाएं एक मनोचिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक होता है। आज जिस तादाद में हमारे देश में डिप्रेशन की शिकार रोगियों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है उनके लिए मनोवैज्ञानिकों का परामर्श आवश्यक है । हर उम्र एवं वर्ग के लोगों में डिप्रेशन की शिकायत देखने को मिल रही है।उनकी समस्याओं का निदान मनोवैज्ञानिक और मनोविज्ञान के क्षेत्र में कार्यरत लोगों द्वारा की जाती है।मनोचिकित्सक अगर रोग की जांच करता है तो काउंसलिंग या अन्य प्रकार के दवाई लेकर काफी कम समय में ही व्यक्ति अवसाद से मुक्त होकर स्वस्थ हो जाता है। इसी कारण मनोविज्ञान का क्षेत्र करियर की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है।मनोविज्ञान के क्षेत्र में करियर की काफी अपेक्षित संभावना देखने को मिल रही है और विगत  कुछ वर्षों की बात की जाय तो हर तरह के हॉस्पिटल से लेकर ,बड़े-बड़े राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय कंपनियोंऔर शैक्षणिक संस्थानों में सरकारी-निजी दोनों ही स्तर पर मनोविज्ञान के विशेषज्ञों की मांग बढ़ रही है।

मनोविज्ञान का आशय यह है कि  मनुष्य की सोचने और अलग-अलग नजरिए से अपनी राय व्यवहार से लेकर उनके व्यक्तित्व से संबंधित है।मनोविज्ञान विषय मनुष्य की भिन्न -भिन्न व्यवहार  और अन्य प्रकार के मानसिक प्रारूपों पर कार्य कर सकारात्मक दिशा में एक बेहतर जिंदगी जीने में लोगों को काफी मदद करता है। वर्तमान समय कैरियर से लेकर रिश्तो तक तमाम तरह के जटिलताएं देखने को मिलती है। हर इंसान कि जिंदगी इतनी प्रतिस्पर्धापूर्ण एवं व्यस्त हो गया है कि उसे अपने शरीर को देखभाल करने के लिए भी समय नहीं है।इन सब की वजह से शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो तनावग्रस्त ना हो। ऐसे में मनोवैज्ञानिक अहम भूमिका निभाते हैं। वह ना सिर्फ मनुष्य के अंदर चल रही परेशानियों की वजह एवं अनेक प्रकार की गतिविधियों को समझते हैं बल्कि मूल कारण का पता लगाकर  समाधान भी करते हैं। जिससे व्यक्ति की तमाम प्रकार की उलझने स्वयं खत्म हो जाती है।

  • शैक्षणिक योग्यता –

मनोविज्ञान का अध्ययन साधारण स्तर पर 12वीं(10+2) कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद शुरू होती है।12वीं के पश्चात स्नातक स्तर(ग्रेजुएशन) पर बीए ऑनर्स या बीएससी में मनोविज्ञान विषय को चुना जा सकता है। स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट ) या डॉक्टरोल करके विषय में मनोविज्ञान के क्षेत्र में दक्षता हासिल की जा सकती है।

  • विशेष कौशल-

एक मनोवैज्ञानिक को लोगों की आंतरिक समस्याओं ,मन में चल रहे अनेक प्रकार की गतिविधियों की धैर्य -पूर्वक सुनकर जानने समझने की क्षमता के साथ-साथ एनालिसिस करने की योग्यता होना बेहद आवश्यक है। मनोविज्ञान के विशेषज्ञों का व्यक्तित्व संवेदनशीलता, संचार कुशलता एवं सहयोगी के साथ साथ विनम्र होना अनिवार्य है। मनोविज्ञान के क्षेत्र में सफलता उन प्रकार के व्यक्ति को ही अधिक मिलती है जो सामाजिक रूप से लोगों की सहायता एवं उनके विश्लेषण क्षमता का अवलोकन करते हैं।

  • करियर के  रूप में अनेको हैं विकल्प –
  • मनोविज्ञान का अनेक शाखाएं हैं। व्यक्ति अपने मनपसंद-अनुसार किसी भी एक शाखा में शोध अध्ययन कर विशेषज्ञ बन कर अपना करियर बना सकता है।
  • संज्ञानात्मक मनोविज्ञान- इस शाखा में मनुष्य के मस्तिष्क संबंधी विजुलाइजेशन, इमेजिन  से जुड़े समस्या एवं समाधान की क्षमताओं का अध्ययन किया जाता है।
  • शैक्षिक मनोविज्ञान-  इस मनोविज्ञान के अंतर्गत बुजुर्ग एवं बालकों के शिक्षा संबंधित व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक पहलुओं का विस्तृत में अध्ययन किया जाता है। जिसमें अनेक प्रकार की विकृतियां,आकलन वीडियो का अध्ययन एवं कक्षा प्रबंधन से जुड़े गुर एवं परिणाम सुधारने के तरीके जैसे मेथड और इसमें और पुरजोर दिया जाता है। 
  • सामाजिक मनोविज्ञान-इस मनोविज्ञान केंद्र सामाजिक माहौल और व्यक्ति के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।
  • क्लीनिकल मनोविज्ञान- यह मनोविज्ञान के मत्वपूर्ण शाखा है जिसके अंतर्गत व्यक्ति की  आंतरिक दिमाग में चल रहे समस्याओं को रोकथाम अर्थात मनोविज्ञान संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को उनके  परेशानी एवं कष्टों से राहत दिलाने का प्रयास किया जाता है। 
  • खेल मनोविज्ञान-जैसा कि यह सभी लोगों को पता है कि एक एथलीट को   जो किसी भी खेल से संबंधित खिलाड़ी हो उससे ना सिर्फ शारीरिक तौर पर बल्कि मानसिक रूप से काफी मजबूत होना  पड़ता है। एक खिलाड़ी को परिपक्वता एवं बेहतरीन प्रदर्शन के लिए आधुनिक समय में मनोवैज्ञानिक उनके साथ रहते हैं।
  • संगठनात्मक-औद्योगिक मनोविज्ञान-इस  मनोविज्ञान के  शाखा के अंतर्गत किसी भी कंपनी या कारोबार बड़े या छोटे स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों अथवा कर्मचारियों  के बीच काम करने योग्य वातावरण का सृजन करना इसके अलावा उनके बीच हमेशा अधिक सक्रियता और अनेक प्रकार कार्यसिद्धि  के लिए जॉब सेटिस्फेक्शन में वृद्धि करने के उपायों का अध्ययन किया जाता है। 
  • वेतन-

 

आधुनिक समय में मनोविज्ञान क्क्षेत्र में सरकारी स्तर पर और गैर सरकारी स्तर पर दोनों ही विभागों में नौकरियों के अवसर काफी मौजूद हैं।सरकारी संस्थानों में  एक नियत रूप में वेतनमान प्रदान किया जाता है। शुरूआती समय में सरकारी क्षेत्र की बात करें तो 25,000 से 30,000 रुपए तक प्रतिमाह मिलती है।गैर सरकारी संस्थाओं में आकर्षक  सालाना पैकेज के साथ-साथ मासिक वेतनमान भी मिलता है जो ₹50,000 से ₹100000 से भी अधिक तक हो सकता है।

  • प्रमुख संस्थान-

मनोविज्ञान से सबंधित अनेक प्रकार के कोर्स ना सिर्फ कॉलेजों ,विश्वविद्यालयों में बल्कि ऐसे कई निजी इंस्टिट्यूट हैं जहां मनोविज्ञान से जुड़े कोर्स चलाये जाते हैं। जिनमें प्रमुख निम्नलिखित हैं।

  • बेंगलुरु विश्वविद्यालय
  •  उत्कल विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर
  • राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर
  • बीएचयू यूनिवर्सिटी, वाराणसी
  •  गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद 
  • हैदराबाद विश्वविद्यालय
  •  जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
  •  अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अली
  •  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल
  •  मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदय
  •  उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदरा
  •  केंद्रीय मनोरोग चिकित्सा संस्थान, रांची
  • राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु 
  • मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।