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बुजुर्गों(ज़रा-विज्ञान) की सेवा क्षेत्र में करियर | Complete Information

बुजुर्गों(ज़रा-विज्ञान) की सेवा क्षेत्र में करियर | Complete Information
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बुजुर्गों(ज़रा-विज्ञान) की सेवा क्षेत्र में करियर

जब भी हम कोई ऐसा कार्य करते हैं जो दूसरों के लिए भलाई के लिए हो। ऐसे निःस्वार्थ सेवा ना सिर्फ सामाजिक तौर पर हमारे मनोदशा को बदलता है बल्कि एक आत्मीय रूप से ख़ुशी प्रदान करता है।ऐसे लोगों को समाज में मसीहा भी कहा जाता है, परंतु क्या आपको पता है कि अगर आप सामाजिक कार्य में रुचि रखते हैं तो  इस क्षेत्र में विशेषज्ञ बनकर आप अपना सेवा विस्तार कर सकते हैं और ना सिर्फ समाजिक रूप से बल्कि वित्तीय रूप से भी काफी सक्षम बन सकते हैं।जी हां अगर आप हेल्थ एंड सोशल जेरेन्टोलॉजी में स्नातक स्तरीय डिप्लोमा करते हैं आम बोलचाल की भाषा में जरा विज्ञान का कोर्स भी कहा जाता है तो आप बुजुर्गों की देखभाल को करियर के रूप में अपना सकते हैं। शुरुआत में दिल्ली विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स में पहली बार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सहायता से  हेल्थ एंड सोशल जेरेन्टोलॉजी का कोर्स आरंभ किया था। परंतु थोड़े ही वर्षों में प्रायोगिक रूप से जरूरत को देखते हुए अन्य संस्थान भी जरा विज्ञान से संबंधित कोर्स आरंभ किया है। विशेषकर उनके लिए जो समाज करने के इच्छुक होते हैंउस तरह के विद्यार्थी क्षेत्र में करियर के एक नई राह के साथ शुरुआत कर सकते हैं जिनमें उनका भविष्य काफी उज्जवल है। आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने संयुक्त परिवार से दूरी बना लिए हैं इसी कारण एकल परिवारों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सुनहरे एवं मनचाहे करियर में भविष्य सवांरने से ज्यादा तवज्जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के लिए लोगों के बिच काफी प्रतिस्पर्धा है।जिसके कारण  अधिकतर प्रोफेशनल लोगों के पास इतना भी समय नहीं कि अपने साथ संयुक्त रूप से परिवार को रख सकें। यही कारण है कि आज बुजुर्गों को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। एकल परिवार के कारण बुजुर्गों को जिस उम्र में सबसे अधिक सेवा एवं आदर की जरूरत होती है उसी समय वह अलग-थलग पड़ जाते हैं इसलिए शहरों में आजकल रीक्रिएशन सेंटर की संख्या अधिक हो गई है। बड़ी तादाद में रिटायरमेंट तथा अस्पताल बनाया जा रहा है जहां बुजुर्गों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य हेतु पर विशेष जोर दिया जाता है। यह कोई विश्व के लिए नई बात नहीं है क्योंकि विदेशों में इस तरह के संस्था और कोर्स लंबे समय से चले आ रहे हैं क्योंकि वहां परिवार प्रथा है ही नहीं। परंतु अब हमारे देश जो अपने विभिन्न संस्कृति एवं सभ्यता के लिए जाना जाता है जहां इस तरह के  समस्याएं बढ़ती जा रही है उसी के आधार पर समाधान के प्रयास को देखते हुए जरा विज्ञान से संबंधित अन्य प्रकार के कोर्स सरकारी शिक्षण संस्थानों द्वारा प्रारंभ किए गए। जो एक रोजगार के साथ-साथ समाज सेवा के रूप में विद्यार्थियों को अग्रसर करता है।

  • कोर्स-

इस कोर्स को मुख्य रूप से बुजुर्गों  से संबंधित आवश्यकता, नीतियों और कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।के अलावा मनोवैज्ञानिक पहलु ,आहार ,स्वास्थ्य और बुजुर्गों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने का गुर भी विद्यार्थियों को सिखाया जाता है।जरा विज्ञान क्षेत्र में प्रमुख रूप से जेरियेटिक केयर या जेरेन्टोलॉजिकल काउंसलिंग में डिप्लोमा,इंस्टिट्यूट ऑफ़ होम इकोनॉमिक्स इन जेरेन्टोलॉजी,हेल्थ एंड सोशल जेरेन्टोलॉजी डिप्लोमा कोर्स चलाये जा रहे हैं।

  • प्रवेश प्रक्रिया

 जरा विज्ञान से संबंधित कोर्स करने के लिए बुधवार को किसी भी संकाय 50% अंक  के साथ स्नातक होना अनिवार्य है। इसके अलावा वैसे प्रोफेशनल जिन्होंने फिजियोथैरेपी,ऑक्यूपेशनल थेरेपी  या नर्सिंग क्षेत्र से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त किये हों वे लोग भी इस क्षेत्र में प्रवेश ले सकते हैं।

  • अवसर- 

अपने देश(भारत) में बुजुर्गों की आबादी  तेजी से बढ़ने के कारण और इसके साथ-साथ समाज में एकल परिवारों की संख्या में बढ़ोतरी की वजह से इसमें  रोजगार की दृष्टि से काफी अधिक अवसर प्राप्त है।कोर्स पूरा होने के बाद विद्यार्थी विभिन्न पलकों पर रिसर्च कर  निजी सरकारी दोनों ही स्तर पर समाज सेवा तथा प्रशिक्षण कल्याण क्षेत्र अपना योगदान दे सकते हैं।तमाम तरह के राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों, संगठनों में भीड़ उपस्थित होकर, सक्रिय होकर  बुजुर्गों से संबंधित अस्पताल एवं आशियाना बनाने में मदद कर सकते हैं। विभिन्न तरह के कंपनियां जो रिटायरमेंट,कंसल्टेट ट्रैवल मनोरंजन आदि से जुड़े इनमें अच्छी खासी करियर संभावना जराविज्ञान की विशेषज्ञों  के लिए मौजूद है।

  • वेतन- 

इस क्षेत्र में महानगरों और शहरों में रोजगार के अवसर आसानी से मिल जाते हैं। प्रारंभ में ही  प्रतिमाह ₹30,000 से ₹35,000 आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा अनुभव और योग्यता बढ़ने के साथ-साथ वेतन में काफी वृद्धि देखने की मिलती है। अनुभव एवं शोध के आधार पर अपना खुद का निजी सेंटर  खोलकर भी लाखों रुपए कमाए जा सकते हैं।

  • प्रमुख संस्थान-
  •  इंस्टीट्यूट ऑफ काउंसलिंग
  •  टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस
  •  नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल डिफेन्स 
  •  इंस्टीट्यूट आफ होम इकोनॉमिक्स, दिल्ली यूनिवर्सिटी।